Shiv Chalisa with lyrics | Shiv chalisa pdf | शिव चालीसा

Shiv Chalisa with lyrics | Shiv chalisa pdf | Bhakti Sagar Live ( शिव चालीसा ) 

 
Shiv Chalisa with lyrics

शिव चालीसा 

 

शिव जी जिन्हे महादेव के नाम से भी जाना जाता है, हिन्दू देवताओं में से प्रमुख है।

जिस तरह ब्रह्मांड की कोई सीमा नहीं है उसी प्रकार शिव भी अनंत है, उन्हें पूर्ण रूप से प्राप्त कर पाना कोई आम बात नहीं  लेकिन आप उनकी भक्ति कर उनका आशीर्वाद जरूर ले सकते है।

शिव चालीसा आपको शिव जी के प्रति आस्था को बढ़ाता है और आपको संकट और विकत समस्याओ से भी मुक्ति दिलाती है।

आओ मिलकर शिव जी चालीसा का पाठ करें और उनकी आराधना करें।  

Shiv Chalisa with lyrics

आज भक्ति सागर टीम आपके लिए शिव चालीसा के लिरिक्स लेकर आये है। शिव चालीसा लिरिक्स हमने हिंदी और इंग्लिश दोनों में अंकित किये है। आप शिव चालीसा लिरिक्स पीडीऍफ़ भी डाउनलोड कर सकते है।

Shiv chalisa lyrics in hindi

Shiv Chalisa with lyrics

🙏   श्री शिव चालीसा दोहा   🙏

श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान

 

जय गिरिजा पति दीन दयाला 

सदा करत सन्तन प्रतिपाला

भाल चन्द्रमा सोहत नीके 

कानन कुण्डल नागफनी के

अंग गौर शिर गंग बहाये 

मुण्डमाल तन छार लगाये

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे 

छवि को देख नाग मुनि मोहे

 

मैना मातु की ह्वै दुलारी 

बाम अंग सोहत छवि न्यारी

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी 

करत सदा शत्रुन क्षयकारी

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे 

सागर मध्य कमल हैं जैसे

कार्तिक श्याम और गणराऊ

या छवि को कहि जात न काऊ

 

देवन जबहीं जाय पुकारा 

तब ही दुख प्रभु आप निवारा

किया उपद्रव तारक भारी 

देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी

तुरत षडानन आप पठायउ 

लवनिमेष महँ मारि गिरायउ

आप जलंधर असुर संहारा

सुयश तुम्हार विदित संसारा

 

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई

सबहिं कृपा कर लीन बचाई

किया तपहिं भागीरथ भारी

 पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी

दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं 

सेवक स्तुति करत सदाहीं

वेद नाम महिमा तव गाई। 

अकथ अनादि भेद नहिं पाई

 

प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला 

जरे सुरासुर भये विहाला

कीन्ह दया तहँ करी सहाई 

नीलकण्ठ तब नाम कहाई

पूजन रामचंद्र जब कीन्हा 

जीत के लंक विभीषण दीन्हा

सहस कमल में हो रहे धारी 

कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी

 

एक कमल प्रभु राखेउ जोई 

कमल नयन पूजन चहं सोई

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर 

भये प्रसन्न दिए इच्छित वर

जय जय जय अनंत अविनाशी 

करत कृपा सब के घट वासी

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै  

भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै

 

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो

यहि अवसर मोहि आन उबारो

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो 

संकट से मोहि आन उबारो

मातु पिता भ्राता सब कोई 

संकट में पूछत नहिं कोई

स्वामी एक है आस तुम्हारी 

आय हरहु अब संकट भारी

 

धन निर्धन को करत सदाहीं 

जो कोई जांचे वो फल पाहीं

अस्तुति केहि बिधि करौं तुम्हारी 

क्षमहु नाथ अब चूक हमारी

शंकर हो संकट के नाशन 

मंगल कारण विघ्न विनाशन

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं 

नारद शारद शीश नवावैं

 

नमो नमो जय नमो शिवाय 

सुर ब्रह्मादिक पार न पाय

जो यह पाठ करे मन लाई 

ता पार होत है शम्भु सहाई

ॠनिया जो कोई हो अधिकारी

 पाठ करे सो पावन हारी

पुत्र हीन कर इच्छा कोई

निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई

 

पण्डित त्रयोदशी को लावे

ध्यान पूर्वक होम करावे 

त्रयोदशी व्रत करे हमेशा 

तन नहीं ताके रहे कलेशा

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे 

शंकर सम्मुख पाठ सुनावे

जन्म जन्म के पाप नसावे 

अन्तवास शिवपुर में पावे

कहत अयोध्या आस तुम्हारी

जानी सकल दुःख हरहु हमारी

🙏  दोहा  🙏

 

नित्त नेम कर प्रात ही, 

पाठ करौं चालीसा

तुम मेरी मनोकामना, 

पूर्ण करो जगदीश

मगसर छठि हेमन्त ॠतु 

संवत चौसठ जान

अस्तुति चालीसा शिवहि 

पूर्ण कीन कल्याण

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