होली का इतिहास और महत्व: History & Importance of Holi festival in hindi

वैसे तो मनुष्य स्वभाव से ही उत्सव प्रेमी है, परंतु ऐसा प्रतीत होता है कि भारतवर्ष के लोग कुछ अधिक उत्सव प्रेमी है जितने उत्सव भारत में मनाए जाते हैं उतने शायरी संसार के किसी अन्य देश में मनाए जाते होंगे और यह उत्सव भी विविध प्रकार की है और विविध ढंगो से मनाए जाते हैं। भारतीय उत्सव में होली का एक अपना ही अनोखा स्थान है  इस उत्सव की कोई बराबरी नहीं है।

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होली का त्योहार कब मनाया जाता है? (When we celebrate holi)

होली उत्सव फागुन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है इस समय बसंत ऋतु का आगमन हो रहा होता है और लोगों के मन आनंद से प्रफुल्लित होते हैं न केवल मनुष्य बल्कि वृद्धा वनस्पतियों भी फूलों से इस प्रकार सज उठती है कि मानो फूली नहीं समा रही और रबी की फसल तैयार होने को होती है। इसलिए होली का त्योहार फरवरी या मार्च के महीने में मनाई जाती है

होली मनाने का कारण (why we celebrate holi festival in india)

भारत जैसे देश में जहां कृषि ही लोगों की जीविका का मुख्य आधार फसल की तैयारी के अवसर पर उत्सव मनाना बिलकुल स्वाभाविक बात है यह दोनों बड़े उत्सव होली और दिवाली फसलों की तैयारी के अवसर पर ही मनाए जाते हैं 6 महीने परिश्रम करके और काफी प्रतीक्षा करते रहने के बाद जब किसानों की अपनी सुनहरी फसल तैयार हो जाती है और पक जाती है तो लोगों का आनंद लें डूब जाना स्वभाविक है। और उनका यही आनंद होली के रंगीन कुंवारों के रूप में चारों ओर बिखर पड़ता है। 

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होली का इतिहास( History of holi and importance of holi)

होली के साथ एक प्राचीन पौराणिक कथा का भी संबंध है। कहा जाता है कि बहुत पहले एक हिरणकश्यप नाम का पराक्रमी और अत्याचारी और बहुत ज्यादा घमंडी राजा था। जो खुद को भगवान जितना शक्तिशाली समझता था उसने अपने राज्य में भगवान की पूजा न करने की घोषणा कर दी थी जिससे उसके राज्य में कोई भी भगवान को नहीं पूजता था।

जो भी हिरण कश्यप की आज्ञा का पालन नहीं करता था तो हिरण कश्यप उसे मृत्यु दंड देता था जिससे राज्य के सभी लोग उससे डरते थे और और ना चाह कर भी वह भगवान की पूजा नहीं करते थे। हिरण कश्यप ने राज्य के सभी लोगों को अपनी पूजा करने के लिए आदेश दिया था जिससे राज्य के सभी लोग अब हिरण कश्यप की पूजा करते थे।

हिरण कश्यप का अपना एक पुत्र था जिसका नाम प्रहलाद था पहलाद बचपन से ही भगवान की पूजा करता था और भगवान का बहुत बड़ा भक्त भी था हिरण कश्यप ने उसे बहुत डराया धमकाया उसे अनेक प्रकार के कष्ट दिए लेकिन फिर भी प्रहलाद भगवान की पूजा करता था।
हिरण कश्यप ने प्रहलाद को पहाड़ से गिराया लेकिन भगवान विष्णु ने उसे बचा लिया। हिरण कश्यप में अपने पुत्र को नदी में डुबो दिया लेकिन फिर भी प्रह्लाद को छोटी सी चोट भी नहीं आती थी क्योंकि भगवान विष्णु जी प्रहलाद को बचा लेते थे और उसकी हमेशा सदैव रक्षा करते थे। 

होलिका दहन घटना (Holika Dahan)

हिरण कश्यप की बहन का नाम होलीका था जिसे यह वरदान प्राप्त था कि आग द्वारा उसकी मृत्यु नहीं हो सकती । इसलिए होलीका को आग से कोई भय नहीं था। कोई उपाय न देख हिरणकश्यप ने अंततः अपने बहिन होलिका से सहायता ली। होलिका ने यह स्वीकार कर लिया कि वह प्रहलाद को गोद में लेकर चिता में बैठ जाएगी जिससे प्रहलाद जलकर भस्म हो जाए। 
जब वो प्रहलाद को लेकर चिता में बैठी तो भगवान की कृपा से प्रहलाद तो सकुशल बच गया और होलिका जलकर राख हो गई होलिका का वरदान की यह शर्त थी कि यदि वह अकेली आग में बैठेगी तभी उस पर आंख का असर नहीं होगा। 
इस पूरी घटना को हम होलिका दहन के नाम से भी जानते हैं यह कथा सत्य हो या असत्य किंतु इसका अर्थ केवल इतना ही है कि संसार में पाप और अत्याचार की प्पराजय होती है और न्याय और धर्म की विजय होती है

धर्म की इस विजय की स्मृति को ताजा रखने के लिए हर साल होली मनाई जाती हैं और लकड़ियों का एक ढेर लगाकर उसमें आग लगा दी जाती है और यह समझा जाता है कि होली का उसमें जलकर राख हो रही है।

होली मनाने की विधि (how to celebrate holi in india)

होली मनाने की विधि सभी जगह एक जैसी ही है होली के दिन किसी चौराहे पर लकड़ियों का ढेर इकट्ठा किया जाता है दिन में किसान लोग नई फसल के अनाज की बालियां तोड़ कर लाते हैं शाम के समय लकड़ियों में आग लगाई जाती है लोग इस आग में अनाज की बालियो को भूनते हैं और फिर उन्हें घर में ले जाकर कुछ खाते हैं और कुछ रख देते हैं इसी शुभ माना जाता है उसके बाद रात में बड़ी देर तक नृत्य गीत इत्यादि होते रहते हैं वैसे तो होली का यह संगीत गांव गांव में कई दिन पहले से ही शुरू हो जाता है परंतु होली की रात को यह अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाता है सारी रात लोग नाचते-नाचते आनंद करते बिता देते हैं।

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होली से अगले दिन धुलैड़ी होती है बहुत सारे राज्यों में इसे छड़ेली के नाम से भी जानते हैं। लोग सवेरे से ही सफेद कपड़े पहन कर गुलाल रंगीन पानी और पिचकारिया लेकर निकल पड़ते हैं और जो भी सामने मिले उसके मुंह पर रंग लगाते हैं और रंगीन पानी चढ़ाते हैं और एक दूसरे से मिलते हैं और प्रेम में एक दूसरे का अभिनंदन करते हैं
उत्तर भारत में होली तीन-चार दिन पहले से ही शुरू हो जाती है जहां पर गांव के सभी युवा लोग सारे गांव में जाकर घर घर में होली के गीत गाते हैं और होली की बधाइयां देते हैं। 
दोपहर के 12:00 बजे तक रंग का हुड़दंग चलता रहता है लोगों की टोलियां रंग बिरंगे कपड़े पहनकर भूतों का वेश बनाए तरह-तरह के गीत गाना और नाच संगीत के साथ सड़कों पर घूमते रहते हैं सब शहरों में और गांवों में होली का एक अलग ही जश्न मनाया जाता है। 
दोपहर होने के बाद रंग फेकना बंद हो जाता है लोग स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनते हैं और मिठाई लेकर अपने इष्ट मित्रों के पास जाते हैं और उन्हें होलियां की बहुत सारी बधाइयां देकर वापस लौटते हैं
बहुत सारे गांव कस्बों में सुबह होली खेलने के बाद दिन में नहा धोकर  स्वच्छ कपड़े पहन कर मंदिर जाते हैं और वहां पूजा करके पूरे गांव में प्रसाद बांटते हैं 

होली से हमें क्या सिखने को मिलता है? (What do we learn from Holi?)

होली से हमें यह सीखने को मिलता है कि हमें हमेशा सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए और हमें हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए।
होली एक प्रेम का त्योहार माना जाता है और समझा जाता है कि होली में सब शत्रुता को भूल जाना चाहिए और फिर से नए सिरे से मित्रता शुरू करनी चाहिए। वैसे तो होली हिंदू धर्म में मनाई जाती है लेकिन आजकल होली सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि अन्य धर्म के भी लोग उत्साह के साथ मनाते हैं ।

हमें यह सीखने को भी मिलता है कि कैसे हम त्योहार में धर्म को रख भाईचारा बढ़ा सकते हैं। होली हमें यह भी सिखाती है कि हमें हमेशा ऊपर वाले पर भरोसा रखना चाहिए और भगवान जी की पूरी श्रद्धा के साथ उनकी पूजा करनी चाहिए 

हम आशा करते हैं आपको होली के बारे में जानकर अच्छा लगा होगा और अगर आपको किसी भी जानकारी या हमारी वेबसाइट भक्ति सागर लाइव में कोई भी असुविधा होती है तो हम माफी मांगते हैं आप अपना सुविचार हमें ईमेल कर सकते हैं हमारी पोस्ट पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
 

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