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दीपावली का इतिहास और महत्व: History & Importance of diwali festivals

(दीपावली का इतिहास और महत्व) अमावस की काली अंधेरी रात में जगमगाती हुई दीपक की पंक्ति और रंग बिरंगी फूलझड़ी से लोगों के मन में उत्साह रहता है। चारों तरफ खुशहाली का माहौल और लोग अपने सारे दुख दर्द भूल कर पूरे उल्लास के साथ दीपावली का भरपूर आनंद लेते हैं।  प्रकाश का यह पर्व भारत के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है इस दिन देश के सारे बड़े नगर और गांव  प्रकाश में डूबे रहते हैं । दीपावली का यह नजारा हम अंतरिक्ष से भी देख सकते हैं क्योंकि दीपावली में अंधकार का नामो निशान मिट जाता है। मानो ऐसा लगता है कि अंधकार जैसी कोई चीज ही नहीं होती।

 

दीपावली को प्रकाश का पर्व कहना उचित होगा अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व प्रतिवर्ष कार्तिक मास की अमावस्या के दिन इतनी धूमधाम से मनाया जाता है कि संभव होली को छोड़कर और कोई पर इतने उल्लास के साथ नहीं मनाया जाता होगा। दीपावली पर्व भारत में ही नहीं पूरे विश्व में मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है और सबसे बड़ी बात विदेशी लोग दीपावली मनाने का कारण भी जानते हैं और पूरे उत्साह के साथ दीपावली का आनंद लेते हैं।

दीपावली का इतिहास ( History of Dipawali)-

दीपावली का इतिहास (history of dipawali)  वैसे तो हर भारतीय नागरिक भलि-भांति जानता है और दीपावली के महत्व (importance of dipawali) को समझता है दीपावली सिर्फ एक त्यौहार ही नहीं बल्कि यह भारत में एक भावना है यह भावना है सत्य की जो कि अंधकार पर विजय प्राप्त करने से हुई है। 

 

दीपावली का इतिहास और सार रामायण कथा में है। रामचंद्र जी मर्यादा पुरुषोत्तम थे अपने पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए राजपाट को तिलांजलि देकर वह 14 वर्ष के वनवास के लिए निकल गए । भगवान श्री राम श्रीमती सीता और लक्ष्मण जी ने 14 वर्ष का वनवास जीवन व्यतीत किया।  वनवास में भगवान श्रीराम ने बहुत सारे कष्ट और समस्याओं का सामना करना पड़ा। जहां उन्होंने बहुत सारे राक्षसों का वध और बहुत सारे राक्षसों को मुक्ति भी दिलाई थी। 

 

श्रीमती मां सीता जी का अपहरण दुष्ट रावण ने छल कपट द्वारा किया और मां सीता को बंदी बनाकर कई वर्षों तक लंका में ही रखा, भगवान श्री राम और लक्ष्मण जी मां सीता को ढूंढते हुए दक्षिण की तरफ गए और उन्हें वहां परमभक्त बजरंगबली जी का सहयोग मिला और पूरी सेना के साथ उन्होंने लंका में कूच किया । 

 

अहंकारी रावण की पूरी सेना को समाप्त करके और रावण के सभी भाइयों को मूर्ख मुक्ति प्रदान कर, अंत में जब लंका के अत्याचारी और दुष्ट राजा रावण का वध करके जब वे अयोध्या लौटे तो अयोध्या वासियों का आनंद से पागल हो उठना स्वभाविक ही था इस खुशी में उन्होंने उस रात भी के दीपक जलाए थे पाप के ऊपर हुई पुण्य की उस विजय की याद को ताजा रखने के लिए तब से अब तक सारे देशवासी प्रति वर्ष दीपावली का उत्सव मनाते आ रहे हैं। 

 

दीपावली को लक्ष्मी पूजा का पर्व भी कहा जाता है कहा जाता है कि लक्ष्मी जी की पूजा करने से घर में धन सुख समृद्धि आती है और लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहती है।  इस दिन व्यापारी लोग विशेष रूप से लक्ष्मी जी की पूजा करते हैं अपना नया वर्ष प्रारंभ करते हैं I पुराने बहिखाते समाप्त करके नए बहिखाते शुरू करते हैं इसके पीछे का मुख्य कारण यही है कि प्राचीन काल में वर्षा ऋतु के 4 महीनों में व्यापार लगभग बंद हो जाता है तब घोड़े खच्चरों और बैल गाड़ियों के युग में व्यापार कैसा रहता होगा इसकी कल्पना सरलता से की जा सकती है 

दीपावली का महत्व (importance of diwali)-

 

दिवाली भारत का बहुत प्राचीन त्यौहार है दिवाली भारत का बहुत प्राचीन त्यौहार है वैसे तो इस पर्व का संबंध रामचंद्र जी के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने के साथ जोड़ दिया जाता है। परंतु ऐसा प्रतीत होता है कि यह त्यौहार इस देश में उससे भी बहुत पहले से मनाया जाता रहा है इसके कई कारण है।

 

दीपावली मनाए जाने का पहला कारण तो यह है कि भारत चिरकाल से कृषि प्रधान देश रहा है जहां पर कृषि ही प्रमुख आय हैं इसीलिए यहां के दोनों बड़े बड़े त्यौहार होली और दिवाली फसल के तैयार होने के समय मनाए जाते हैं जब रबी फसल पक कर तैयार हो जाती है तब होली मनाई जाती है और जब खरीफ फसल तैयार होती है तब दिवाली मनाई जाती है। फसल घर आने की खुशी में किसान लोग फूले नहीं समाते और अपने मन के आनंद को दीप जला कर प्रकट करते हैं। 

 

दीपावली मनाए जाने का दूसरा कारण स्वास्थ्य के नियमों से संबंध है बरसात के महीनों में मकान सील जाते हैं सब भूल कीचड़ और गंदगी फैल जाती है मक्खी और मच्छर पैदा हो जाते हैं जब वर्षा ऋतु की समाप्ति पर घरों और नगरों के नए सिरे से सफाई करना आवश्यक होता है इसलिए दीपावली से पहले घर साफ किए जाते हैं मकानों में सफेदी की जाती है और रात के समय दीपक जलाए जाते हैं इन दीप को को इतनी बड़ी संख्या में जलाने का एक प्रयोजन यह भी है कि सामान्य लोग समझते हैं कि रामचंद्र जी के वापस लौटने पर मनाई जाती है। 

इसलिए जब वर्षा समाप्त होती थी तो व्यापारी लोग यह आशा करते थे कि अब नए सिरे से व्यापार चमकेगा और उनके घरों में लक्ष्मी का आगमन होगा इसी आशा में वे लोग लक्ष्मी जी की पूजा करते हैं । 

 

दीपावली से हमें क्या शिक्षा मिलती है? What lessons do we get from Diwali?

 

दिवाली से हमें यह सीखने को मिलता है कि कैसे हम अपने जीवन के अंधकार को समाप्त कर सकते हैं और अपने जीवन को किस प्रकार नई दिशा दे सकते हैं हमें हमेशा सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए और भगवान पर हमें हमेशा भरोसा रखना चाहिए।

जिस तरह भगवान श्रीराम ने अपने पिताजी के एक आदेश पर 14 वर्ष का वनवास जाने के लिए तैयार हो गए थे उसी प्रकार हमें भी अपने पिता का सम्मान करना चाहिए और उनके सभी आदेश का पालन भी करना चाहिए। और पाप कितना भी कर लो उसका घड़ा भरना निश्चित है और साथ में हमारा अंत भी, और हमें हमेशा अच्छे रास्तों पर चलना चाहिए और अच्छे कर्म करने चाहिए।

 

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