Shardiya Navratri Kitne Din Ka Hai.?

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Shardiya Navratri Kitne Din Ka Hai.?

यह जो नवरात्रि है अश्विन के नवरात्रि है.

अश्विनी शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से जो नवरात्र शुरू होती है उन्हें शारदीय नवरात्र कहा जाता है.

 

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Shardiya Navratri Kitne Din Ka Hai.?यह जो नवरात्रि है अश्विन के नवरात्रि है.अश्विनी शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से जो नवरात्र शुरू होती है उन्हें शारदीय नवरात्र कहा जाता है.घटस्थापना का शुभ मुहर्त कब है.?सुबह का पहला मुहर्त का समय-: 22 सितम्बर 2025 के दिन नवरात्री के पहले सोमवार के प्रतिपदा तिथि मे सुबह के समय 6 बजकर 15 मिनट से 10 बजकर 20 मिनट तक यानि 06:15 से 10:20 तक का समय घट स्थापना का शुभ मुहर्त है.दुसरा घाटस्थापना का शुभ मुहूर्त कब है.?Shardiya Navratri Kitne Din Ka Hai.?कौन से तरीके से घटस्थापना की जाए.?शारदिया नवरात्री मे कलश के अंदर क्या क्या डालना चाहिए.?जब हम कलश स्थापना करते हैं. उसे समय कलश के अंदर हम गंगाजल, पानी, चंदन, रोली, हल्दी की गांठ, फुल, दुर्वा, अक्षर, सुपारी, और एक रुपय का या 2 रूपए का सिक्का डालेंगे कलश के अंदर.कलश की स्थापना के समय कोनसा मंत्र बोले.?कलश के अंदर समाग्री डालते समय मंत्र बोलना है. ( ॐ नमशचंडिकाय )आपको यह मंत्र ( ॐ नमशचंडिकाय ) बोलते हुऐ कलश के अंदर चंदन, रोली, और जो भी समाग्री है उसको चढ़ा देना है इस मंत्र को बोलते हुऐ.आम के कितने पत्ते लगाये कलश के अंदर.?कलश प्राणप्रतिष्ठा के समय कोनसा मंत्र बोलना चाहिए.?मंत्र का अर्थ और महत्व क्या है.?मंत्र का प्रभाव:   __ इस मंत्र का जाप करने से जल तत्व में संतुलन और शुद्धता आती है, व्यक्ति को न्याय और सत्य के मार्ग पर चलने की शक्ति मिलती है, और उसे जीवन में शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है.Shardiya Navratri Kitne Din Ka Hai.?नवरात्र कब से कब तक रहेगा.?22 सितंबर 2025 को ——–मां शैलपुत्री की पूजा होगी. 23 सितंबर 2025 को ——–मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी. 24 सितंबर 2025 को—— मां चंद्रघंटा की पूजा होगी. 25 सितंबर 2025 को ——-तृतीया तिथि है. 26 सितंबर 2025 को—— मां कुष्मांडा की पूजा होगी. 27 सितंबर 2025 को——स्कंदमाता की पूजा होगी. 28 सितंबर 2025 को—— मां कात्यायनी की पूजा होगी. 29 सितंबर 2025 को—— मां कालरात्रि की पूजा होगी. 1 अक्टूबर 2025——— को मां सिद्धिदात्री की पूजा होगी. 2 अक्टूबर 2025—— को दुर्गा जी का विसर्जन होगा(दशहरा)पूजा के नियम और समय विधि.?मां कालरात्रि की पूजा के लिए सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें, फिर शुद्ध आसन पर बैठकर देवी की प्रतिमा या चित्र पर गंगाजल छिड़कें. रोली, अक्षत, धूप, दीप और गुड़हल के फूल अर्पित करें. मां को गुड़ और गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाएं. इसके बाद मां कालरात्रि की आरती करें और मंत्रों का जाप करें.मां कालरात्रि पूजा विधि:तैयारी: सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ वस्त्र पहन लें.संकल्प: देवी कालरात्रि की पूजा का संकल्प लें.पूजा स्थान: मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करें और पूजा स्थान पर मां कालरात्रि की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.दीप प्रज्वलित करना : घी का दीपक जलाएं और माता के जयकारे लगाएं.सामग्री अर्पित करना: रोली, अक्षत, गुड़हल के फूल, लौंग, बताशा, गुग्गल और गुड़ आदि अर्पित करें.भोग लगाना: मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाएं.आरती और पाठ: मां की आरती उतारें. आप दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकते हैं.मंत्र जाप: लाल चंदन की माला से मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करें.मां का प्रिय भोग: मां कालरात्रि को गुड़ बहुत प्रिय है, इसलिए उन्हें गुड़ या गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाना चाहिए.Shardiya Navratri Kitne Din Ka Hai.?इस बार शारदिया नवरात्री 10 दिन का होगा.

भारतीय पंचांग के अनुसार 22 सितम्बर दिन सोमवार को शारदीय महीने के शुक्ल पक्ष के प्रतिपदा रात 1:30 मिनट पर चालू जायेगी

उसके अगले दिन सोमवार 23 सितम्बर की रात 2:55 मिनट पर खत्म हो जाएगी.

 

22 सितंबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो जाएगी और माता रानी का आगमन हो जाएगा.

 

घटस्थापना का शुभ मुहर्त कब है.?

सोमवार 22 सितंबर के दिन घट स्थापना करना है और माता रानी की पूजा चालू हो जायेगी.
आगे पढ़े……

 

(और अगर आप भोजपुरी भजन सुनते हैं तो इस लोक गायिका का भजन जरूर सुनिए ज्योति प्रजापति आजकल इनका भजन बहुत ही ज्यादा प्रचलित में है तो आप इनका भजन जरूर सुनिए और नवरात्र में माता रानी को अपने घर बुलाइये )

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घट स्थापना कब और कोनसे समय करनी चाहिए.?

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सुबह का पहला मुहर्त का समय-:
22 सितम्बर 2025 के दिन नवरात्री के पहले सोमवार के
प्रतिपदा तिथि मे सुबह के समय 6 बजकर 15 मिनट से 10
बजकर 20 मिनट तक यानि 06:15 से 10:20 तक का समय घट स्थापना का शुभ मुहर्त है.

दुसरा घाटस्थापना का शुभ मुहूर्त कब है.?

घटस्थापना का दुसरा मुहूर्त दोपहर मे है|
दोपहर 12 बजे से 12:50 tak का समय भी घटस्थापना के लिये शुभ मुहूर्त मना गया है इस समय आप घटस्थापना कर सकते है |

22 सितम्बर दिन सोमवार को शारदिया नवरात्री का 2 शुभ मुहूर्त है जिसमे आप घटस्थापना (कलश )कर सकते है
सुबह का मुहूर्त – 06:15 से 10:20 तक
दोपहर का मुहूर्त – 12:00 से 12:50 तक
इस समय आप घटस्थापना कीजिये माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त होगा.

Shardiya Navratri Kitne Din Ka Hai.?

कौन से तरीके से घटस्थापना की जाए.?

घटस्थापना करने के लिए सबसे पहले आपको एक साफ सुथरी चौकी लेनी है| चौकी पर लाल कलर का वस्त्र बिछाना है.

फिर आपको मिट्टी का एक कलश लेना है और उस कलश के अंदर साफ जल भरना है.

 

आपको सबसे पहले साफ बालू लेना है और लाल कपड़े के ऊपर रखकर कलश में पानी भरकर कलश को उस बालू के ऊपर रख देना है.

जब हम बालू के ऊपर कलश की स्थापना करेंगे उसे समय आम के पल्लू यानी आम के पत्तों को धोकर उस कलश में रखेंगे.

 

और कलश के ऊपर एक खड़ा नारियल का गोला लाल कपड़े में मौली से बांधकर स्थापना करना है|

लेकिन सबसे पहले कलश मे क्या क्या डालना है इस को जानना जरुरी है.

शारदिया नवरात्री मे कलश के अंदर क्या क्या डालना चाहिए.?

जब हम कलश स्थापना करते हैं.
उसे समय कलश के अंदर हम गंगाजल, पानी, चंदन, रोली, हल्दी की गांठ, फुल, दुर्वा, अक्षर, सुपारी, और एक रुपय का या 2 रूपए का सिक्का डालेंगे कलश के अंदर.

कलश की स्थापना के समय कोनसा मंत्र बोले.?

जब हम घटस्थापना यानी कलश की स्थापना और कलश के अंदर ज़ब हम पूजा समाग्री को डालते है उस समय
यह मंत्र बोलना होता है.

कलश के अंदर समाग्री डालते समय मंत्र बोलना है.
( ॐ नमशचंडिकाय )

आपको यह मंत्र ( ॐ नमशचंडिकाय ) बोलते हुऐ कलश के अंदर चंदन, रोली, और जो भी समाग्री है उसको चढ़ा देना है इस मंत्र को बोलते हुऐ.

आम के कितने पत्ते लगाये कलश के अंदर.?

कलश के अंदर आम के 5 पत्ते,11 पत्ते, और 21 पत्ते भी लगा सकते है | आगे और पढ़े…..निचे की तरफ….

कलश प्राणप्रतिष्ठा के समय कोनसा मंत्र बोलना चाहिए.?

कलश के प्राणप्रतिष्ठा के लिये ये मंत्र जरूर बोले हाथ मे चावल लेकर – यह मंत्र 3 बार बोलना है और जो चावल हाथ मे है उसे कलश के पास छिड़कना है यह मंत्र 3 बार बोलते हुऐ| और इसी को प्राणप्रतिष्ठा बोलते है.
(ओम वरुण देवता भ्यो नमः)

मंत्र का अर्थ और महत्व क्या है.?

ओम वरुण देवता भ्यो नमः: यह एक वैदिक मंत्र है जिसका अर्थ है “भगवान वरुण को नमस्कार”।

वरुण कौन हैं: वरुण हिंदू धर्म में जल के देवता, ब्रह्मांडीय व्यवस्था (ऋत) के रक्षक और न्याय के देवता है.

मंत्र का प्रभाव:   __
इस मंत्र का जाप करने से जल तत्व में संतुलन और शुद्धता आती है, व्यक्ति को न्याय और सत्य के मार्ग पर चलने की शक्ति मिलती है, और उसे जीवन में शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है.

इन मंत्रों का जाप करके आप जल तत्व से जुड़े लाभ और वरुण देव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं.

कलश की स्थापना क्यो होती है.?

ब्रह्मांड पुराण के अंदर और अग्नि पुराण के अंदर यह लिखा है|की जल से ही सृष्टि का निर्माण हुआ है.

तीनों लोक के देवी और देवता जल को ही सर्वश्रेष्ठ और शुद्ध और जीवन मानते हैं और इसीलिए बड़े से बड़े महायज्ञ और कथा और किसी भी धार्मिक पूजा में कलश की स्थापना होती है.

Shardiya Navratri Kitne Din Ka Hai.?

नवरात्र कब से कब तक रहेगा.?

22 सितंबर 2025 को ——–मां शैलपुत्री की पूजा होगी.
23 सितंबर 2025 को ——–मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी.
24 सितंबर 2025 को—— मां चंद्रघंटा की पूजा होगी.
25 सितंबर 2025 को ——-तृतीया तिथि है.
26 सितंबर 2025 को—— मां कुष्मांडा की पूजा होगी.
27 सितंबर 2025 को——स्कंदमाता की पूजा होगी.
28 सितंबर 2025 को—— मां कात्यायनी की पूजा होगी.
29 सितंबर 2025 को—— मां कालरात्रि की पूजा होगी.
1 अक्टूबर 2025——— को मां सिद्धिदात्री की पूजा होगी.
2 अक्टूबर 2025—— को दुर्गा जी का विसर्जन होगा(दशहरा)

पूजा के नियम और समय विधि.?

मां कालरात्रि की पूजा के लिए सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें, फिर शुद्ध आसन पर बैठकर देवी की प्रतिमा या चित्र पर गंगाजल छिड़कें. रोली, अक्षत, धूप, दीप और गुड़हल के फूल अर्पित करें. मां को गुड़ और गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाएं. इसके बाद मां कालरात्रि की आरती करें और मंत्रों का जाप करें.

पूजन सामग्री:
गंगाजल,
लाल रंग के वस्त्र,
रोली,
अक्षत,
गुड़हल का फूल
लौंग,
बताशा
गुग्गल
हवन सामग्री,
गुड़,
रातरानी के फूल,
लाल चंदन की माला (रुद्राक्ष की माला भी इस्तेमाल कर सकते हैं)

मां कालरात्रि पूजा विधि:

तैयारी:
सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ वस्त्र पहन लें.

संकल्प:
देवी कालरात्रि की पूजा का संकल्प लें.

पूजा स्थान:
मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करें और पूजा स्थान पर मां कालरात्रि की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.

दीप प्रज्वलित करना :
घी का दीपक जलाएं और माता के जयकारे लगाएं.

सामग्री अर्पित करना:
रोली, अक्षत, गुड़हल के फूल, लौंग, बताशा, गुग्गल और गुड़ आदि अर्पित करें.

भोग लगाना:
मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाएं.

आरती और पाठ:
मां की आरती उतारें. आप दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकते हैं.

मंत्र जाप:
लाल चंदन की माला से मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करें.

मां का प्रिय भोग:
मां कालरात्रि को गुड़ बहुत प्रिय है, इसलिए उन्हें गुड़ या गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाना चाहिए.

Shardiya Navratri Kitne Din Ka Hai.?

इस बार शारदिया नवरात्री 10 दिन का होगा.

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